महिला आरक्षण बिल पर अधिवक्ता फराह फैज़ का समर्थन, बोलीं—“चुनाव से पहले लागू हो, तभी मिलेगा असली फायदा”

Advocate Farah Faiz supports the Women's Reservation Bill
सहारनपुर : महिला आरक्षण बिल को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच सहारनपुर से एक अहम प्रतिक्रिया सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता और समाजसेवी फराह फैज़ ने इस बिल को मोदी सरकार का “वेलकम स्टेप” बताते हुए इसका खुलकर समर्थन किया है। फराह फैज़ का कहना है कि अगर यह बिल चुनाव से पहले लागू किया जाता है, तो इसका वास्तविक लाभ देखने को मिलेगा। इससे महिलाएं सीधे चुनाव लड़कर संसद तक पहुंच सकेंगी और अपनी समस्याओं को मजबूती से उठा पाएंगी। फराह फैज़ ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अगर पहले की सरकारों की राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत होती, तो शाहबानो केस जैसे मामलों में महिलाओं को समय पर न्याय मिल सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं के मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दी, खासकर मुस्लिम महिलाओं के मामलों में।
आपको बता दें कि फराह फैज़ न सिर्फ एक महिला अधिवक्ता हैं बल्कि तीन तलाक कानून की मांग उठाने वाली याचिका कर्ता रही हैं। मोदी सरकार में महिला आरक्षण बिल लागू करने की बात हुई तो उन्होंने भी बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अब तक कई महिलाएं अपनी बात सदन तक नहीं पहुंचा पाती थीं, लेकिन 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने से उनकी भागीदारी बढ़ेगी। इससे न केवल महिलाओं की आवाज मजबूत होगी, बल्कि नीतियों में भी उनका सीधा योगदान दिखाई देगा। फराह फैज़ ने आगे कहा कि लंबे समय तक एक बड़ी कम्युनिटी की महिलाएं समस्याओं से जूझती रहीं, लेकिन मौजूदा सरकार ने तीन तलाक जैसे मुद्दों पर फैसला लेकर राहत देने का काम किया है। फराह फैज़ के मुताबिक, महिलाएं घर संभालने के साथ-साथ देश भी संभाल सकती हैं और संसद में जाकर हर मुद्दे को बेहतर तरीके से उठा सकती हैं। जब महिला घर संभाल सकती है तो संसद भी चला सकती है।
उन्होंने कहा कि यह बिल अनुच्छेद 15 के तहत सभी महिलाओं को बिना किसी भेदभाव के 33% आरक्षण देता है। इसमें धर्म या वर्ग के आधार पर कोई अलग कोटा नहीं रखा गया है, जो इसकी सबसे बड़ी खासियत है। फराह फैज़ ने कहा कि जब महिलाएं घर और परिवार की जिम्मेदारी संभाल सकती हैं, तो वे संसद में भी बेहतर तरीके से काम कर सकती हैं। उनके अनुसार, महिलाओं को जमीनी समस्याओं की बेहतर समझ होती है, जिससे वे नीति निर्माण में अहम भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर यह बिल चुनाव के बाद लागू होता है, तो इसकी प्रभावशीलता कम हो जाएगी। इसलिए इसे चुनाव से पहले लागू करना जरूरी है, ताकि महिलाएं सीधे चुनावी प्रक्रिया में भाग ले सकें।

फराह फैज़ का कहना है कि महिला आरक्षण बिल को चुनाव से पहले लागू करना ज्यादा फायदेमंद साबित होगा। उनका मानना है कि अगर यह बिल पहले लागू होता है, तो महिलाएं सीधे चुनाव में हिस्सा लेकर संसद तक पहुंचेंगी और अपनी समस्याओं को मजबूती से उठा सकेंगी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से महिलाएं अपनी बात सदन तक नहीं पहुंचा पा रही थीं, लेकिन इस बिल के जरिए उन्हें एक मजबूत मंच मिलेगा। “बिलकुल यह मोदी सरकार का वेलकम स्टेप है। अगर यह चुनाव से पहले लागू होता है तो इसका फायदा ज्यादा मिलेगा।

फराह फैज़ ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अगर पहले की सरकारों की राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत होती, तो शाहबानो केस जैसे मामलों में महिलाओं को समय पर न्याय मिल जाता और तीन तलाक का मुद्दा भी पहले ही सुलझ सकता था। अगर कांग्रेस की विल पावर स्ट्रॉन्ग होती तो शाहबानो को इंसाफ मिल जाता और तीन तलाक का मुद्दा इस तरह लंबा नहीं चलता। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के लिए ऐतिहासिक काम किया है और अब महिला आरक्षण बिल के जरिए सभी वर्गों की महिलाओं को समान अवसर मिलेगा। यह बिल आर्टिकल 15 के तहत सभी महिलाओं को बिना किसी भेदभाव के 33% आरक्षण देता है। कुल मिलाकर महिला आरक्षण बिल को लेकर सहारनपुर से सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। फराह फैज़ ने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम बताया है, जो देश की राजनीति में बदलाव ला सकता है।
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